मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

काश वो इल्जाम मै लेलिया होता


आज ही मैं पल्लवी जी का blogg पढ़ रहा था .बहुत अच्छा लिखतीं हैं वो .. उनकी लेखन शैली गजब की है ! उन्होंने  संटी पर एक बहुत ही सुंदर लेख लिखा है जिसे पढ़ कर मुझे अपने बचपन के दिन याद आगये. यहाँ आकर लिखने बैठ गया कितनो की नज़र पड़ेगी इसपर पता नहीं .. अगर उनकी नज़र पड़ जाए जिसकी वजह से मुझे संटी पड़ी थी तो सायद लिखना सफल हो जाये.....

चलिए सुरुवात करतें हैं.................!
बात मेरे बचपन की है वैसे तो बचपन मेरा बहुत उथल पुथल में बिता कभी गाव में पढ़े तो कभी फरीदाबाद (शहर) में  .. अभी मैं शहर से गाव आया हूँ वहां मैं फिफ्थ में था..! गाव के राजेंद्र नगर स्कूल में मेरे दादा जी दाखिला दिलाने ले जाते हैं. सभी बच्चों का दुलारा हूँ क्यों की मैं शहर से आयां हूँ  ! प्रधानाचार्य महोदय मेरा intervew लेतें हैं .
प्रधानाचार्य जी  .......  भाई साहब बच्चा बहुत तेज है !
दादा जी प्रधानाचार्य जी से ...... गुरु जी  तेज कहें नहीं रहिये शहर में  जो पढ़त रहे. 
प्रधानाचार्य  जी ....... हम इसका admission  कच्छा आठ में कर देंतें हैं .
दादा जी प्रधानाचार्य जी से ........... नहीं नहीं गुरु जी ,  कच्छा आठ में बहुत  बड़े -बड़े  लड़का बाटें.. .....हमर नाती अभी छोटा बा. आप इनकर दाखिला कच्छा पाच में  ही कर देई !  
और  दादा जी के कहने पर मेरा दाखिला कच्छा पाच में कर दिया जाता  है.  उस  समय गावों में जमीं पर टाट पर बैठा कर प्रायमरी  के स्कूलों  में पढाया जाता था ! मै टाट पर बैठने से इनकर कर देता हूँ सभी बच्चे हंस कर मेरा मजाक उड़ा देंते हैं  
हार मान कर मैं भी उस भीड़ में सामिल हो जाता  हूँ ..अब आतें हैं कहानी के मुख्य धरा में ...........................
उसी कच्छा में कुछ ही दिन पहले एक लड़की आई रहती है मुंबई से .......अब जगह मुंबई है तो मुंबई का कुछ असर भी होगा ना .... आगे आपको पता चल जायेगा पढ़ते रहिये! ओ खुबसूरत सा गोल चेहरा घुंघुराले बाल उससे भी कहीं ज्यादा खुद पर घमंड  इस सहजादी का नाम है आकांछा राय !
अभी तक ये क्लास की मोनिटर है ......सभी बच्चो में रौब है अब मेरे आने से यह पद इनके हाथ से निकल कर मेरे हाथ में चला आता है इन्हें मुझसे जलन होने लगती  है मगर  मुझे नहीं क्यों की मै delhi से आया हूँ आखिर शहर का असर तो रहेगा न. अब कुछ दिन बीतते हैं इन दिनों में ये मुझे संटी लगवाने का पूरा बंदोबस्त कर लेती हैं. और इन्ही दिनों में  क्लास के सभी लड़के और लड़कियां मेरे अच्छे दोस्त बन जातें हैं क्यों की मै बहुत मिलनसार हूँ किसी की गलती होने पर अपने मानिटर होने का रौब नहीं जमाता, ना दोस्तों की गलतियों  को गुरु जी तक पहुंचाता   खुद ही निपटा देते ! मैं मैथ्स में बहुत तेज हूँ.. सभी बच्चों को मैं ही मैथ्स पढ़ता हूँ .....!
एक दिन लंच के बाद पांचवी घंटी चल रही थी तभी अचानक किसी के रोने की आवाज आई ....सबके साथ मैं भी देखता हूँ की कौन रो रहा आवाज तो किसी लड़की की है अगले ही पल मेरी नज़र उनके चेहरे पर पड़ती है .. वही  घुघुराले बाल गोल चेहरा और गालों से होकर आशुवों    का काफिला किताबो में घुस रहा है !आचार्य जी ने रोने का  कारन पूछा ....
जबाब मिला .....और मेरे कानो को यकीं नहीं हो रहा था की मैं क्या सुन रहा हूँ.
आचार्य जी ,
रवि ने मेरे  बैग में लेटर रखा है ..........................................................?
मेरे पाँव से जमीं खिसक गई .... ....ये ऐसा इल्जाम था जिसे उस घटना के बाद आजतक किसी ने नहीं दिया .
मैं अवाक् हूँ की आखिर ये मुझपर इल्जाम क्यों लगा रही है .........क्या चाहती है मुझसे ?
मुझे तो  लेटर का मतलब भी नहीं पता है .....बस इतना जनता हूँ की पापा को चिठ्ठी लिखता हूँ पर मेरे पापा की चिठ्ठी इसके बैग में कैसे आ गई! सबकी नज़रे मुझे ऐसे देख रही थी मानो अब मुझे जीने नहीं देंगी!
इतने में आचार्य जी मुझे अपने पास बुलाते हैं ...
और सवाल दागते हैं .....
रवि...........तुमने लेटर लिखा  ?
नहीं सर ,
मैंने कोई लेटर नहीं रखा वो  पीछे बैठती है मै तो उधर जाता भी नहीं हूँ!
सर का कोटा भी शायद अधुरा था ......आखिर एक बच्चे को उन्होंने कभी संटी नहीं लगाई थी वो  आज पूरा होने वाला था.
सीधे खड़े होकर हाथ आगे करो .......
डर के मारे मेरे पाँव हिल रहे हैं......और हाथ आगे निकल रहे हैं
अगले ही पल सटाक - २ की पांच आवाज से पूरा क्लास गूंज गया सभी भाई बहनों को मेरे पीटने का दुख है सिर्फ उनको छोड़ कर , मै अपनी जगह जा कर बैठ जाता हूँ  मेरे बैठते ही मेरा एक दोस्त आचार्य जी को सुझाव देता है !
आचार्य जी पहले लेटर तो देख लीजिये लिखा क्या है हैण्ड राइटिंग किसकी है ..................?
मुझसे अपने दोस्त पर गुस्सा आता है !
बेवकूफ सलाह भी दिया तो मेरे पीटने के बाद खैर आचार्य जी का भी माथा ठनका   और उन्होंने लेटर मांग कर देखना सुरु किया ! ओह बेचारी
लेटर की पहली लाइन ......
"अकांछा मै तुमसे बहुत प्यार करती हूँ .............................................?"
सर ने घूरती हुई आखों  से अकांछा के तरफ देखा,  उन्हें विस्वास हो रहा था की रवि को थी और था अच्छी तरह मालूम है .
अकांछा ...किसने लिखा है ये लेटर ?
सर रवि ने ,
झूट बोल रही हो तुम .....आहा ये मैं क्या सुन रहा हूँ अब मेरा दर्द गायब आतुर हूँ सुँनने के लिए की आखिर लिखा किसने ?
तुम अपनी नोट बुक लाओ ..
अब उसका चेहरा उतर रहा   है वो अपनी नोट बुक लाती   है ....आचार्य जी नोट बुक और लेटर देखने के बाद गुस्से में.
बतमीज चलो सीधे कड़ी हो जाओ और हाथ आगे करो..........!
क्लास पहले से भी ज्यादा सांत है और सटाक -२ की १० आवाज पुरे क्लास की सांति को भंग कर देती  हैं.
चु ..चु ...चु ...ये नाजुक गोरी हथेलिया इन संटियो को कैसे सह  रही है ....मै पहले पांच खा के बैठा हूँ इन्हें १० मिल रही है.
सभी भाई बहन मुझे विस्वास की नज़र से देखतें है मानो मैंने अग्नि परीछा पास कर ली हो...
अगले दिन से वो  घुघुराले बाल वाला गोल चेहरा क्लास से गायब हो जाता है और आजतक नहीं दिखा !
आज सोचता हूँ काश  वो  इल्जाम मै अपने सर लेलिया होता तो बेचारी पीटने से बच जाती ...और school  से ना जाती !
आप क्या सोचा रहें हैं ?
                                          








10 टिप्‍पणियां:

  1. ravi bhaiya aap bahut acha likhte hai



    amar rajbhar

    9278447743

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  2. ravi ji
    yah aapki achhi soch ka hi roop hai ki aapko baad me pachhtava hua .par isme galti aapki bhi nahi thi.kasur var aur bekasur dono ko hi saja mili.par han! aachary ji ko jarur pahle khat padh lena chahiye tha ,bevajah santi khane se to bach jaate-----;)
    poonam

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  3. Thanks Poonam Ji,
    aapne sahi kaha par ye achary ji log kisi ki sunate kahan hain... o bhi santi hath me ho to fir kya puchhna.

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  4. AMAR RAJBHAR JI


    RAVI BHAIYA AAP BAHUT AAGE CHALKAR BAHUT BADE KAVI BANOGE


    AMAR RAJBHAR JI
    SURHAN ANANDNAGAR
    MARTINGUNJ AZAMGARH
    9278447743

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  5. kyun pitaba diya aapne us bechari ko...unhe pitte dekh aapko jara bhi rehm nhi aaya...waise mujhe bahut hanshi aarhi hai...ha ha ha ha...akansha main tumse bahut payar karti hu....kitni bholi galti ki ti bechari ji ne...waise 10 unhe or 5 aapko mubarkho....mere pas bhi ek aesi kahani hai kabhi post karungi...padhiyega jarur

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. Hehehe......
    Aji ham ne kaha pitwa diya..... o batai to hoti ki ham aapko pitwana chahte hain....ham unke liye khusi khusi pit jate aur unhe bacha lete.

    blog agman ke liye abhar.

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  8. कोई बात नहीं, रवि जी आपको जो ठीक लगा आपने वही लिखा ना atleast लिखा तो सही उतना ही बहुत है। आप मेरी पोस्ट पर आए और अपने विचार प्रस्तुत किए उसके लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया कृपया यूंहीन संपर्क बनाए रखिएगा धन्यवाद......

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