सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

पलको में छुपा रखा था






हमने चुने थे  मोहब्बत के तिनके , दिल का आशियाना  बनाने   के लिए
बेरहम नसीम  ने सब कुछ बिखरा दिया, अब अर्श है सर  छुपाने  के लिए  


सोचा     था     वो      खुश       रहेंगे       आकर     मेरे      आँगन     में 
पलको  में  छुपा  रखा  था,  मकसद    था    धुप   से   बचाने    के   लिए


हम    वफ़ा    कर    सके    या      नहीं     ये      खुदा      जाने      यारो 
अपना   सब    कुछ    खो    दिया    है    बस     उन्हें     पाने    के लिए 


वो   कहते    हैं      आप     हँसते      हुए     बहुत     अच्छे   लगते    हो 
हम      मुस्कुरा      देते     हैं     बस     उन्हें      हँसाने      के       लिए 


कुछ     आसुवों    को     दामन     में      बचा     कर    रखिये     रकीब 
दर्द    और   भी     है    जिंदगी     में     आपको     रुलाने     के     लिए 


जो     मिला      है      उसी      को         मुकद्दर    समझ     लो    रवि 
किस्मत   तुमसे   भी     आगे      है    तुम्हे     आजमाने     के     लिए 



43 टिप्‍पणियां:

  1. सोचा था ओ खुश रहेंगे आकर मेरे आँगन में
    पलको में छुपा रखा था, मकशद था धुप से बचाने के लिए
    kitne khoobsurat khyaal

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  2. इसे कहते हैं दिल की बात....रचनाधर्मिता बनी रहे..बधाई.

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  3. aapke dil ne mahsus kiya
    hamara likhna safal huwa
    thankx Yadav ji.

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  4. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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  5. भावपूर्ण ग़ज़ल के लिए बधाई।

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  6. Bahut-2 dhanyabad Dr. Shahiba
    aapke badhai sandesh hamari anmol dharohar.

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  7. रवि जी,बहुत ही सुन्दर कविता लिखते हे आप सिर्फ 'श' को 'स' मत लिखिए ? आशा हे बुरा नही मानेगे -- -

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  8. बढ़िया अभिव्यक्ति के लिए शुभकामनायें!

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  9. Respected Mam,
    yahan bura manane jaisi koi baat hi nahi hai..
    ye aapka adhikar hai aur mera saubhagya ki mujhe aap jaise blogg reader ka sath mila .

    blogg agaman ke liye bahut-2 dhanyabad.

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  10. वो कहते हैं आप हसते हुवे बहुत अच्छे लगते हो
    हम मुस्कुरा देते हैं बस उन्हें हँसाने के लिए

    आपकी लेखनी में दम है ..यह गजल भी बहुत भावप्रवण है ...सुंदर भावों का संगम है
    एक प्रार्थना करना चाहूँगा
    कृपया शब्दों पर ध्यान दें ...गलतियाँ भाव में बाधा बनती हैं ...
    सोचा था ओ खुश रहेंगे आकर मेरे आँगन में
    पलको में छुपा रखा था, मकशद था धुप से बचाने के लिए
    ओ ...वो *
    मकशद ...मकसद *
    हसते हुवे
    हँसते हुए *
    आशुवो ..आंसुओं *
    है हैं *
    यदि इन शब्दों को इस तरह लिखें तो और भी आनंद आएगा ...आपका आभार

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  11. कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...
    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो NO करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  12. apka bahut-2 sukriya kewal ram ji,

    kuchh font ke suport na karne se ho jati hain.
    baki abhi mai sikha hi raha hun...
    mujhe khusi hai ki aap log har shabd par dhyan dete hain.

    Dil se aapko dhanyabad.

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  13. हा...हा...हा.....
    ये इश्क नहीं आसां ......मजनू जी .....
    मगर इश्क ने कलम तो पकड़ा दी ....
    बहुत खूब .....

    हाँ आपकी कहानी भी पढ़ी .....
    उधर कमेन्ट बॉक्स नहीं मिला तो उसका जवाब भी इधर ही दे देती हूँ .....
    "अकांछा मै तुमसे बहुत प्यार करती हूँ ............
    दोबारा नहीं आई तो आप उसे ढूंढ कर मना लेते ....
    या सर को रोक लेते मारने से ...
    सर जाने दीजिये बेचारी मुझसे प्यार करने लगी है .....
    ):):):

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  14. :):)
    apke aane se hi blog ki raunak badh jati hai "Heer" ji.
    aapne sahi kaha ki ishq asan nahi hai....:):)

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  15. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  16. Nahi Madam ji,

    yaha bhi pyar mere nasib me nahi hai....
    o to sirf mujhe santi lagwane ka intejam kar rakhi thi...
    par bechari..........:):):)

    (udhar comment box to khul raha hai)
    Blog visit ke liye abhar

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  17. बहुत सुंदर रचना बाधाई
    कभी समय मिले तो http://shiva12877.blogspot.com ब्लॉग पर भी अपनी एक नज़र डालें,
    कृपया फालोवर बनकर उत्साह वर्धन कीजिये.

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  18. बेहतरीन गजल
    हर शेर मे भाव स्वतः ही मुखर हो रहे है
    शुभकामनाये
    अच्छा लगा आपका ब्लाग

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  19. dhanyabad saini ji,
    aapne gazal ki har sher ko samjha.

    blogg pasand aur follw karne ke liye aap ka abhar.

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  20. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द| धन्यवाद|

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  21. खूबसूरत जज्बातों से सजी बहुत ही प्यारी ग़ज़ल...

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  22. ravi ji
    bahut hi vistaar se apni tabiyat ke baare me likh tha par post karne me mujhse hi ku chh galti ho gai .par ab jdubaara jyaada nahi likh sakti. bas aap pareshaan na ho ,pet me sujan hai thoda waqt lagega theek hone me .isi se jyaada der net par nahi aa pati .deri se comment ke baare me aap sabhi se xhma chahati hun.
    aapke itne umda sher par meri taraf se do panktiyan---

    wah! wah! hi nikalta hai
    har sher ko padh kar
    par ye moohabbat hai janaab
    padna na isme ise khel samajh kar
    bahut hi behtreen prastuti---
    poonam

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  23. Adarniya Poonam ji,
    Ye jankar hame bahut dukh huwa ki aap abhi swasth nahi hai.
    Pet ki sujan hai jo thoda chinta ka vishay hai..
    Par Mai Sabhi Mitro ki taraf se duwayen karta hun ki aap ati-sighra swasth ho gaye.

    aur comment jaruri nahi hai .... pahle aapka swasth jaruri hai.

    is samay bhi aapne blogg visit kiya ham aapke
    abhari hain.

    aur Haa Mam
    ye mohabbat hi to hai jo aapse ke bich me mujhe bhi ek jagah di hai.:):)

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  24. Thanx Pooja ji,
    aapne mahsus kiya ham likhane me safal huwe.
    -Abhar-

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  25. kafi achhi gazal hai bro...........
    ..............padhkar kafi achha laga..........
    .......best of luck bro......

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  26. Thanks to
    Sawai Man Singh ji,
    Patali-the-village aur Rajbhar ji..

    aap sabhi ne blogg visit kiya ....abhar.

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  27. कुछ आसुवों को दामन में बचा कर रखिये रकीब
    दर्द और भी है जिंदगी में आपको रुलाने के लिए

    बहुत खूबसूरत गज़ल ...

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  28. Thanks to Respected Mam,
    Sangita Swaroop ji and Rahul Singh Ji.

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  29. आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

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  30. Bahut-2 dhanybad bhaskar bhaiya

    aapke ane se hamre blog ki raunak bad gai.

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  31. वो कहते हैं आप हँसते हुए बहुत अच्छे लगते हो
    हम मुस्कुरा देते हैं बस उन्हें हँसाने के लिए
    bahut khoob kahi ,sundar

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  32. Thanx 4 your nice comment joti singh ji :)
    :
    :
    :
    Thanx u Sawai singh rajput ji....4 blog visit.

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