सबसे पहले तो ब्लॉग से थोड़ी सी दुरी रखने के लिए माफ़ी चाहूँगा..आप सभी ब्लॉगर दोस्तों की बहुत याद आती है.हालाँकि मेरे ब्लॉग को फालोव करने वाले देवी व सज्जन बहुत कम है..... पर पढ़ने वाले इतने सम्मानित लोग है की ... अपनी रचनाये उनके सामने प्रश्तुत कर मुझे खुसी मिलती है ! ब्लॉग से थोडा सा दूर इसलिए हूँ की जून में मेरा सी .ए. का exam है... ! exam बाद फिर से आपलोगों के सामने हाज़िर होऊंगा ...आज कोई कविता या गजल नहीं एक ताजी घटना है..!
परसों की बात है मै कही जा रहा था अपनी bike से की अचानक एक १२-१३ शाल का लड़का बिना साइड हाथ या इंडिकेटर जलाये ही मेरे सामने से ही मुड गया ... फिर क्या एक टक्कर और वो सड़क के किनारे गिरा में बिच सड़क पर .... देखते ही देखते एक स्वस्थ शारीर में 5 -6 पट्टिया और डॉक्टर की जान लेने वाले injection से दो चार होना पड़ा ...! जहा एक्सिडेंट हुवा कुछ भाई लोगो ने उठा कर रिक्से पर बिठाने की औपचारिकता पूरी की ! में गुस्से में लाल हो गया लेकिन उस बच्चे का मासूम सा डरा हुवा चेहरा देख कर अपने आपको रोक लिया अब गुस्सा आई उसके माँ बाप पर जिन्होंने इस छोटी सी उम्र में ही उसे bike पकड़ा दी और खुद मोहल्ले वालो के सामने सीना तान कर चलते होंगे, और ये बच्चे दूसरो के लिए मुसीबत खड़ा कर देते हैं ...अगर वो सामने होते तो २-४ जूते तो जमा ही देता ! खैर उन भैयो का सुक्रिया जिन्होंने रिक्से पर बिठाया ! फिर रिक्शेवाला ही बेचारा मुझे हॉस्पिटल ले गया ,, जब डॉक्टर ने सितम गिराना सुरु किया तो मुझे जोर जोर से मम्मी की याद आने लगी .....! बचपन में में जब भी बीमार पड़ता था मम्मी ही मुझे डॉक्टर के पास ले जाती थी ...
मम्मी के हाथ रखते ही डॉक्टर के injection का दर्द गायब...! पर आज बहुत दर्द हो रहा था मम्मी नहीं थी न इस लिए. आज मम्मी गाँव में है और मै शहर मे ... कहने को तो बहुत से लोग अपने है .. पर अपने नहीं!
सच मे हम कभी कभी कितने अकेले हो जाते है न ?
परसों की बात है मै कही जा रहा था अपनी bike से की अचानक एक १२-१३ शाल का लड़का बिना साइड हाथ या इंडिकेटर जलाये ही मेरे सामने से ही मुड गया ... फिर क्या एक टक्कर और वो सड़क के किनारे गिरा में बिच सड़क पर .... देखते ही देखते एक स्वस्थ शारीर में 5 -6 पट्टिया और डॉक्टर की जान लेने वाले injection से दो चार होना पड़ा ...! जहा एक्सिडेंट हुवा कुछ भाई लोगो ने उठा कर रिक्से पर बिठाने की औपचारिकता पूरी की ! में गुस्से में लाल हो गया लेकिन उस बच्चे का मासूम सा डरा हुवा चेहरा देख कर अपने आपको रोक लिया अब गुस्सा आई उसके माँ बाप पर जिन्होंने इस छोटी सी उम्र में ही उसे bike पकड़ा दी और खुद मोहल्ले वालो के सामने सीना तान कर चलते होंगे, और ये बच्चे दूसरो के लिए मुसीबत खड़ा कर देते हैं ...अगर वो सामने होते तो २-४ जूते तो जमा ही देता ! खैर उन भैयो का सुक्रिया जिन्होंने रिक्से पर बिठाया ! फिर रिक्शेवाला ही बेचारा मुझे हॉस्पिटल ले गया ,, जब डॉक्टर ने सितम गिराना सुरु किया तो मुझे जोर जोर से मम्मी की याद आने लगी .....! बचपन में में जब भी बीमार पड़ता था मम्मी ही मुझे डॉक्टर के पास ले जाती थी ...

सच मे हम कभी कभी कितने अकेले हो जाते है न ?
अच्छी अभिवयक्ति
जवाब देंहटाएंमाँ तो बस माँ होती है
Is bhri duniya me koi bhi hmara nhi hae .
जवाब देंहटाएंSach kaha aapbne Deepak bhai..
जवाब देंहटाएंMaa ki jagah duniya me koi kabhi bhi nahi le sakta.
Haa Mata ji
जवाब देंहटाएंapne sahi kaha is bhari duniya me sabhi hamre hai aur koi bhi nahi hai.
sahi kaha... hota hai aisa kai baar
जवाब देंहटाएंJi Di,
जवाब देंहटाएंaisa maine bhi bahut mahsus kiya hai.
ab kaise ho?
जवाब देंहटाएंCA ke abhee exam chal rahe hai 16 last paper hai.... theek to ho na......
sadak par savdhanee se vehicle chalane kee jaroorat hai sabhee ko......
mamma to mamma hee hai.
Ha Mata ji,
जवाब देंहटाएंAb bahut aram hai..... jald hi thik ho jaunga
aplogo ka ashirvad jo hai mere pass.
आपकी उत्साह भरी टिप्पणी और हौसला अफजाही के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
जवाब देंहटाएंमाँ से बढ़कर दूजा कोई नहीं! माँ की ममता और प्यार अमूल्य होता है! उम्मीद है की आपकी तबियत अब पहले से बेहतर है!
ji babli ji sukriya..
जवाब देंहटाएंHa ab kafi sudhar hi.....!
बहुत खूब
जवाब देंहटाएंBlog visit ke liye abhar amrita ji.
जवाब देंहटाएंso true... Sometimes one can be a loner in mid of crowd... very nicely expressed.
जवाब देंहटाएंsach hai aese waqt apno ki kami bahut khalti hai .
जवाब देंहटाएंravi ji
जवाब देंहटाएंकहने को तो बहुत से लोग अपने है .. पर अपने नहीं!
सच मे हम कभी कभी कितने अकेले हो जाते है न ?
bilkul sahi kaha aapne .
aapki baat se puri tarah se sahmat hun.
ab to mata pita hi jaane ki itni kachchi umra me kyon aise kary ki anumati de dete hain.shukar manaiye ki us bachche ko kuchh nahi hua varna aap khud ke sath-sath usako bhi jhelte.
aur aap yun nirash na kariye aapko chahne wale sabhi blogers bandhu hain .han1 kabhi kisi karan -vash koi comments na de paaye to use dil me na rakhiye .
main khud gat decembar se aswasth chal rahi hun p aur kahin comments bhi jyada nhai dal pati .par hamara blog jagat ek parivaar ki tarah hai.
sabhi ek -dusare kimajburi ko achhi tarah samjhte hain
is waqt aap apna pura dhyaan apni padhai par hi lagaiye tippni ki chinta na kijiye.
aapse aapke parivaar me hi kai logo ki ummide judi hongi
.ishwar se prarthana hai ki aapko apna lakxhy prapt ho.
bahut bahut
shubh kamnao ke saath
poonam
Thankx Joti Mishra ji & Joti singh ji..
जवाब देंहटाएंRespected Poonam mam,
जवाब देंहटाएंapki tipaddi se adha dukh hi door ho gaya...
aapki sujhaw hamari anmol dharohar hai....!
sach hai apna blog jagat ek pariwar ki tarah hi hai....! aap logo jaise subhchintak jiske pas honge unhe kuchh nahi hoga...!
aur ab me thik hun..... aur pura dhyan exam par hi.
blog agman ke liye abhar.
hmm, bhavi peedhi ko dekh kar dar lagta hai ki humare bacho ka bhavishy kaisa hoga (kyuki ho sakta hai wo bike uske kisi dost ki ho.... bikes , mobiles, aisi cheeze bacho ko umar se pehle nahi deni chaiye
जवाब देंहटाएंsach mei maa ki boht yaad aati hai, jab hum unke sath rehte the tab sayad unki value itne ache se kabhi samjh hi na paye the, par ab maa boht yaad aati hai
हमारे जीवन मे हर रोज ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं पर हम इतना गहन अध्ध्य्यन नहीं कर पाते है। अफसोश की हम कर पते तो हमारे रिश्तों मे जान आ जाती … .....
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