आज ही मैं पल्लवी जी का blogg पढ़ रहा था .बहुत अच्छा लिखतीं हैं वो .. उनकी लेखन शैली गजब की है ! उन्होंने संटी पर एक बहुत ही सुंदर लेख लिखा है जिसे पढ़ कर मुझे अपने बचपन के दिन याद आगये. यहाँ आकर लिखने बैठ गया कितनो की नज़र पड़ेगी इसपर पता नहीं .. अगर उनकी नज़र पड़ जाए जिसकी वजह से मुझे संटी पड़ी थी तो सायद लिखना सफल हो जाये.....
एक दिन लंच के बाद पांचवी घंटी चल रही थी तभी अचानक किसी के रोने की आवाज आई ....सबके साथ मैं भी देखता हूँ की कौन रो रहा आवाज तो किसी लड़की की है अगले ही पल मेरी नज़र उनके चेहरे पर पड़ती है .. वही घुघुराले बाल गोल चेहरा और गालों से होकर आशुवों का काफिला किताबो में घुस रहा है !
आचार्य जी ने रोने का कारन पूछा ....
जबाब मिला .....और मेरे कानो को यकीं नहीं हो रहा था की मैं क्या सुन रहा हूँ.
आचार्य जी ,
रवि ने मेरे बैग में लेटर रखा है ..........................................................?
मेरे पाँव से जमीं खिसक गई .... ....ये ऐसा इल्जाम था जिसे उस घटना के बाद आजतक किसी ने नहीं दिया .
मैं अवाक् हूँ की आखिर ये मुझपर इल्जाम क्यों लगा रही है .........क्या चाहती है मुझसे ?
मुझे तो लेटर का मतलब भी नहीं पता है .....बस इतना जनता हूँ की पापा को चिठ्ठी लिखता हूँ पर मेरे पापा की चिठ्ठी इसके बैग में कैसे आ गई! सबकी नज़रे मुझे ऐसे देख रही थी मानो अब मुझे जीने नहीं देंगी!
इतने में आचार्य जी मुझे अपने पास बुलाते हैं ...
और सवाल दागते हैं .....
रवि...........तुमने लेटर लिखा ?
नहीं सर ,
मैंने कोई लेटर नहीं रखा वो पीछे बैठती है मै तो उधर जाता भी नहीं हूँ!
सर का कोटा भी शायद अधुरा था ......आखिर एक बच्चे को उन्होंने कभी संटी नहीं लगाई थी वो आज पूरा होने वाला था.
सीधे खड़े होकर हाथ आगे करो .......
डर के मारे मेरे पाँव हिल रहे हैं......और हाथ आगे निकल रहे हैं
अगले ही पल सटाक - २ की पांच आवाज से पूरा क्लास गूंज गया सभी भाई बहनों को मेरे पीटने का दुख है सिर्फ उनको छोड़ कर , मै अपनी जगह जा कर बैठ जाता हूँ मेरे बैठते ही मेरा एक दोस्त आचार्य जी को सुझाव देता है !
आचार्य जी पहले लेटर तो देख लीजिये लिखा क्या है हैण्ड राइटिंग किसकी है ..................?
मुझसे अपने दोस्त पर गुस्सा आता है !
बेवकूफ सलाह भी दिया तो मेरे पीटने के बाद खैर आचार्य जी का भी माथा ठनका और उन्होंने लेटर मांग कर देखना सुरु किया ! ओह बेचारी
लेटर की पहली लाइन ......
"अकांछा मै तुमसे बहुत प्यार करती हूँ .............................................?"
सर ने घूरती हुई आखों से अकांछा के तरफ देखा, उन्हें विस्वास हो रहा था की रवि को थी और था अच्छी तरह मालूम है .
अकांछा ...किसने लिखा है ये लेटर ?
सर रवि ने ,
झूट बोल रही हो तुम .....आहा ये मैं क्या सुन रहा हूँ अब मेरा दर्द गायब आतुर हूँ सुँनने के लिए की आखिर लिखा किसने ?
तुम अपनी नोट बुक लाओ ..
अब उसका चेहरा उतर रहा है वो अपनी नोट बुक लाती है ....आचार्य जी नोट बुक और लेटर देखने के बाद गुस्से में.
बतमीज चलो सीधे कड़ी हो जाओ और हाथ आगे करो..........!
क्लास पहले से भी ज्यादा सांत है और सटाक -२ की १० आवाज पुरे क्लास की सांति को भंग कर देती हैं.
चु ..चु ...चु ...ये नाजुक गोरी हथेलिया इन संटियो को कैसे सह रही है ....मै पहले पांच खा के बैठा हूँ इन्हें १० मिल रही है.
सभी भाई बहन मुझे विस्वास की नज़र से देखतें है मानो मैंने अग्नि परीछा पास कर ली हो...
अगले दिन से वो घुघुराले बाल वाला गोल चेहरा क्लास से गायब हो जाता है और आजतक नहीं दिखा !
आज सोचता हूँ काश वो इल्जाम मै अपने सर लेलिया होता तो बेचारी पीटने से बच जाती ...और school से ना जाती !
आप क्या सोचा रहें हैं ?